1 एंटरप्रेन्योरशिप जिसे हिंदी में उद्यमिता के नाम से जाना जाता है, के तहत किसी व्यवसाय की शुरुआत नए विचार से की जाती है।

2 सामाजिक उद्यमिता, एंटरप्रेन्योरशिप का एक प्रकार है जिसमें ऐसे उत्पादों और सेवाओं का निर्माण किया जाता है जो सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करें।

3 एंटरप्रेन्योरशिप के कई महत्व होते हैं जैसे- रोजगार उत्पन्न करना, आर्थिक शक्ति का विकेंद्रीकरण, नए आविष्कारों को बढ़ावा देना तथा तीव्र आर्थिक विकास करना।

4  सामाजिक उद्यमिता की शुरुआत 1980 के दशक में मानी जाती है। सामाजिक उद्यमिता के भी कई महत्व होते हैं जिनमें सामाजिक समस्याओं को हल करना, देश का सामाजिक विकास, नौकरी सृजन तथा स्वयं ही नीति निर्धारण करना शामिल है।

5 एंटरप्रेन्योरशिप का लक्ष्य ऐसे उत्पादों और विचारों का सृजन करना है जिससे मुनाफा कमाया जा सके। जबकि सामाजिक एंटरप्रेन्योरशिप में ऐसे उत्पाद और सेवाओं का निर्माण किया जाता है जो सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते हो।

 

6 एंटरप्रेन्योरशिप में मुख्यतः आय अर्जन को तवज्जो दी जाती है जबकि सामाजिक एंटरप्रेन्योरशिप में सामाजिक समस्याओं को हल करने का प्रयास किया जाता है।

7 ज्यादातर एंटरप्रेन्योरशिप लाभकारी होते हैं लेकिन सामाजिक एंटरप्रेन्योरशिप अधिकतर गैर-लाभकारी ही होते हैं।

8 एंटरप्रेन्योरशिप में शेयर धारकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है सामाजिक एंटरप्रेन्योरशिप में निवेशकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

9 एंटरप्रेन्योरशिप का लक्ष्य व्यवसाय में प्रगति करना होता है जबकि सामाजिक एंटरप्रेन्योरशिप का लक्ष्य समाज में प्रगति लाना होता है।

10 सामाजिक एंटरप्रेन्योरशिप,  एंटरप्रेन्योरशिप का ही एक प्रकार है।